संपूर्ण गायत्री मंत्र संग्रह: वेदमाता गायत्री का रहस्य, स्वरूप और साधना vedpuransar.com

सभी गायत्री मंत्रों की सम्पूर्ण जानकारी, उनके अर्थ, जप विधि, नियम और आध्यात्मिक रहस्य जानिए। Vedpuransar पर शुद्ध वैदिक ज्ञान।

भूमिका: वेदमाता गायत्री – केवल मंत्र नहीं, चेतना का स्रोत

सनातन धर्म में गायत्री को केवल एक मंत्र के रूप में नहीं देखा गया, बल्कि उन्हें वेदमाता कहा गया है। वेदमाता का अर्थ है — वह दिव्य शक्ति, जिनसे वेदों का प्राकट्य हुआ। जिस प्रकार माता गर्भ से संतान को जन्म देती है, उसी प्रकार गायत्री शक्ति से ही वैदिक ज्ञान का विस्तार हुआ।

गायत्री मंत्र का जप बुद्धि को तेज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साधक की आत्मिक चेतना को जाग्रत करने का माध्यम है। इसी कारण शास्त्रों में कहा गया है कि जहाँ गायत्री का वास होता है, वहाँ अज्ञान, भय और अंधकार स्वयं ही नष्ट हो जाते हैं।

आज जब लोग “सभी गायत्री मंत्र” खोजते हैं, तो उनका उद्देश्य केवल मंत्र पढ़ना नहीं, बल्कि वेदमाता गायत्री के सम्पूर्ण स्वरूप और प्रभाव को समझना होता है। यह ब्लॉग उसी उद्देश्य से लिखा गया है।


वेदमाता गायत्री का शास्त्रीय स्वरूप

वेदों के अनुसार गायत्री कोई साधारण देवी नहीं हैं। वे ब्रह्मशक्ति की साकार अभिव्यक्ति हैं। ऋग्वेद में उन्हें सूर्य तत्व से जोड़ा गया है, क्योंकि सूर्य जैसे प्रकाश देता है, वैसे ही गायत्री बुद्धि को प्रकाशित करती हैं।

उपनिषदों में स्पष्ट कहा गया है कि गायत्री मंत्र का प्रभाव तभी पूर्ण होता है जब साधक उसे श्रद्धा, नियम और निरंतरता के साथ जपता है। बिना भावना के किया गया जप केवल शब्द रह जाता है, जबकि भाव से किया गया जप साधना बन जाता है।


सभी गायत्री मंत्र क्यों अस्तित्व में आए?

अक्सर यह भ्रम रहता है कि गायत्री मंत्र केवल एक ही है। वास्तविकता यह है कि गायत्री एक छंद है, और इस छंद में अनेक देवताओं की उपासना की गई है। प्रत्येक देवता की गायत्री उस देवता की विशिष्ट शक्ति को जाग्रत करती है।

इसी कारण शास्त्रों में अलग-अलग प्रयोजनों के लिए अलग-अलग गायत्री मंत्र बताए गए हैं — कोई बुद्धि के लिए, कोई शक्ति के लिए, कोई रक्षा के लिए और कोई आध्यात्मिक उन्नति के लिए।

विभिन्न प्रयोजन हेतु गायत्री मंत्र संग्रह

विभिन्न प्रयोजन हेतु गायत्री मंत्र संग्रह

शक्ति, समृद्धि और शांति के लिए विशिष्ट गायत्री मंत्र

गायत्री मंत्र

मूल गायत्री मंत्र

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यम् । भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

विष्णु गायत्री मंत्र

ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि । तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥

लक्ष्मी गायत्री मंत्र

ॐ महादेव्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि । तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ॥

नारायण गायत्री मंत्र

ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि । तन्नो नारायणः प्रचोदयात् ॥

कृष्ण गायत्री मंत्र

ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि । तन्नो कृष्णः प्रचोदयात् ॥

शिव गायत्री मंत्र

ॐ महादेवाय विद्महे रुद्रमूर्तये धीमहि । तन्नो शिवः प्रचोदयात् ॥

गणेश गायत्री मंत्र

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥

ब्रह्म गायत्री मंत्र

ॐ भूः ॐ भुवः ॐ स्वः ॐ महः ॐ जनः ॐ तपः ॐ सत्यम् । ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् । ॐ आपो ज्योति रसोऽमृतं ब्रह्म भूर्भुवः स्वरोम् ॥

सर्व शांति हेतु गायत्री मंत्र

ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि । ॐ धियो यो नः प्रचोदयात् ॐ ॥

विद्या प्राप्ति हेतु गायत्री मंत्र

ॐ ऐं तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि । ऐं धियो यो नः प्रचोदयात् ऐं ॥

लक्ष्मी प्राप्ति हेतु गायत्री मंत्र

ॐ श्रीं भूर्भुवः स्वः श्रीं तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि । श्रीं धियो यो नः प्रचोदयात् श्रीं ॥

कामना सिद्धि हेतु गायत्री मंत्र

ॐ ह्रीं भूर्भुवः स्वः ह्रीं तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि । ह्रीं धियो यो नः प्रचोदयात् ह्रीं ॥

वशीकरण हेतु गायत्री मंत्र

ॐ क्लीं भूर्भुवः स्वः क्लीं तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि । क्लीं धियो यो नः प्रचोदयात् क्लीं ॥

शत्रुनाश हेतु गायत्री मंत्र

ॐ क्रीं भूर्भुवः स्वः क्रीं तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि । क्रीं धियो यो नः प्रचोदयात् क्रीं ॥

**सूचना:** सभी मंत्रों का शुद्ध पाठ कॉपी करने के लिए उपलब्ध है।

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गायत्री मंत्र जप का आध्यात्मिक विज्ञान

गायत्री मंत्र का प्रभाव केवल मानसिक नहीं, बल्कि सूक्ष्म स्तर पर कार्य करता है। जप के दौरान उत्पन्न होने वाली ध्वनि तरंगें साधक के प्राण, मन और बुद्धि — तीनों पर प्रभाव डालती हैं। यही कारण है कि नियमित जप करने वाले साधक के जीवन में स्थिरता, विवेक और सकारात्मकता स्वतः आने लगती है।

वेदमाता गायत्री को “बुद्धि प्रदायिनी” कहा गया है। इसका अर्थ यह नहीं कि वह केवल ज्ञान देती हैं, बल्कि वह सही और गलत में भेद करने की शक्ति प्रदान करती हैं।


गायत्री मंत्र जप की सही विधि

गायत्री मंत्र जप के लिए किसी जटिल विधि की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन शुद्धता आवश्यक है। जप शांत मन, स्वच्छ स्थान और स्थिर आसन पर किया जाए तो उसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

प्रातः काल, विशेष रूप से ब्रह्ममुहूर्त में किया गया जप सर्वोत्तम माना गया है, क्योंकि उस समय वातावरण सात्त्विक होता है। माला का प्रयोग साधक को एकाग्र रखने में सहायक होता है, और माला लक्ष्य साधना को अनुशासित करता है।


माला लक्ष्य और संकल्प का महत्व

वेदमाता गायत्री की साधना में संकल्प का विशेष स्थान है। बिना संकल्प के जप दिशाहीन हो जाता है। माला लक्ष्य तय करने से साधक का मन भटकता नहीं और जप निरंतर बना रहता है।

1 माला से लेकर 108 या 1008 माला तक — यह सब साधक की क्षमता और श्रद्धा पर निर्भर करता है। Vedpuransar mantra jap counter पर उपलब्ध जप काउंटर इस साधना को सरल और व्यवस्थित बनाता है।


गायत्री मंत्र जप से होने वाले लाभ

गायत्री मंत्र का जप करने वाले साधक के जीवन में धीरे-धीरे परिवर्तन दिखाई देने लगते हैं। मानसिक तनाव कम होता है, विचारों में स्पष्टता आती है और आत्मविश्वास बढ़ता है। आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो यह जप साधक को धर्म, संयम और सत्य के मार्ग पर स्थिर करता है।

शास्त्रों में यहाँ तक कहा गया है कि नियमित गायत्री जप से पूर्व जन्मों के संस्कार भी शुद्ध होने लगते हैं।


वेदमाता गायत्री – गृहस्थ और साधक दोनों के लिए

यह मान्यता कि गायत्री मंत्र केवल सन्यासियों के लिए है, पूरी तरह गलत है। वेदमाता गायत्री गृहस्थ, विद्यार्थी, माता-पिता और वृद्ध — सभी की माता हैं। जिस घर में श्रद्धा से गायत्री जप होता है, वहाँ कलह और नकारात्मकता टिक नहीं पाती।

वेदमाता गायत्री की शरण

गायत्री मंत्रों का यह संपूर्ण संग्रह केवल जानकारी के लिए नहीं, बल्कि साधना के मार्गदर्शन के लिए है। यदि श्रद्धा सच्ची हो, तो वेदमाता गायत्री स्वयं साधक का मार्ग प्रशस्त करती हैं।


✍️ लेखक: Tejas Lathiya Vedpuransar

यह लेख वेदों, उपनिषदों और शास्त्रीय परंपरा के आधार पर भक्तिभाव से प्रस्तुत किया गया है।

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