संपूर्ण माता बगलामुखी मंत्र संग्रह: स्वरूप, रहस्य, शक्ति और साधना विधि

Sampurn Baglamukhi Mantra Sangrah – Mata Baglamukhi ka rahasya, shakti, sadhana vidhi aur shatru nivaran ke shaktishali upay.

जब जीवन में अचानक शत्रु बढ़ने लगते हैं, जब बिना कारण विरोध, षड्यंत्र, मानहानि या कानूनी उलझनें सामने आने लगती हैं, तब व्यक्ति को यह अनुभव होता है कि केवल बाहरी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे समय में सनातन परंपरा में माता बगलामुखी की साधना को एक अत्यंत प्रभावशाली आध्यात्मिक उपाय माना गया है। माता बगलामुखी केवल तांत्रिक देवी नहीं हैं, बल्कि वे नकारात्मक शक्तियों को स्तंभित करने वाली दिव्य चेतना हैं।

दश महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या के रूप में पूजित माता बगलामुखी का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। उनका नाम ही उनकी शक्ति को प्रकट करता है — बगला अर्थात् वाणी और मुखी अर्थात् मुख। अर्थात् जो शत्रु की वाणी, बुद्धि और कर्म को निष्क्रिय कर दें, वही माता बगलामुखी हैं। यही कारण है कि उन्हें स्तंभन विद्या की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है।

शास्त्रों में माता बगलामुखी का उल्लेख

पुराणों और तांत्रिक ग्रंथों में माता बगलामुखी का वर्णन विशेष परिस्थितियों में प्रकट होने वाली देवी के रूप में मिलता है। ऐसा माना जाता है कि जब सृष्टि प्रलय के कगार पर थी और चारों ओर विनाशकारी शक्तियाँ सक्रिय थीं, तब भगवान विष्णु की तपस्या से माता बगलामुखी प्रकट हुईं और उन्होंने उन शक्तियों को स्तंभित कर सृष्टि की रक्षा की।

यह कथा इस बात का संकेत है कि माता बगलामुखी की शक्ति विनाश नहीं, नियंत्रण की शक्ति है। वे शत्रु को नष्ट करने से पहले उसकी बुद्धि, वाणी और निर्णय क्षमता को जड़ कर देती हैं। यही कारण है कि उनकी साधना को अत्यंत प्रभावशाली लेकिन अनुशासनयुक्त माना जाता है।

माता बगलामुखी का स्वरूप और उसका गूढ़ अर्थ

माता बगलामुखी का स्वरूप पीत वर्ण का है। पीला रंग ज्ञान, स्थिरता और नियंत्रण का प्रतीक माना गया है। वे एक हाथ से शत्रु की जिह्वा पकड़ती हैं और दूसरे हाथ में गदा धारण करती हैं। इसका अर्थ है — गलत वाणी और दुष्ट बुद्धि पर पूर्ण नियंत्रण

उनका पीताम्बर यह दर्शाता है कि उनकी साधना में सात्त्विकता और नियम का विशेष महत्व है। यह देवी आवेश की नहीं, बल्कि सटीक और संतुलित शक्ति की प्रतीक हैं।

माता बगलामुखी मंत्र साधना का वास्तविक उद्देश्य

बहुत से लोग यह समझते हैं कि माता बगलामुखी की साधना केवल शत्रु नाश के लिए होती है, लेकिन यह अधूरी समझ है। वास्तव में उनकी साधना का मुख्य उद्देश्य है:

  • नकारात्मक शक्तियों को निष्क्रिय करना

  • विरोध और षड्यंत्र से रक्षा

  • वाणी पर नियंत्रण और प्रभाव

  • न्यायिक और प्रशासनिक मामलों में स्थिरता

  • भय, भ्रम और मानसिक अस्थिरता का नाश

जब व्यक्ति की बुद्धि स्थिर होती है, तभी वह सही निर्णय ले पाता है। माता बगलामुखी इसी स्थिरता की देवी हैं।

किसके लिए उपयोगी है माता बगलामुखी साधना

माता बगलामुखी की साधना विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी मानी जाती है जो लगातार विरोध, कानूनी विवाद, झूठे आरोप या शत्रुओं की चालों से परेशान रहते हैं। राजनीति, प्रशासन, न्याय, व्यापार, वकालत और नेतृत्व से जुड़े लोगों के लिए भी यह साधना अत्यंत सहायक सिद्ध होती है।

इसके अतिरिक्त जिन लोगों को बोलते समय बार-बार नुकसान उठाना पड़ता है, जिनकी बात को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया जाता है, उनके लिए भी यह साधना वाणी की रक्षा करती है।

माता बगलामुखी मंत्र साधना का श्रेष्ठ समय

माता बगलामुखी की साधना के लिए गुरुवार, मंगलवार और अमावस्या विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त या रात्रि का शांत समय साधना के लिए श्रेष्ठ माना गया है। पीले वस्त्र धारण करना और पीले आसन पर बैठना साधना की ऊर्जा को और प्रभावी बनाता है।

हालाँकि शास्त्र यह भी कहते हैं कि यदि श्रद्धा सच्ची हो, तो साधना किसी भी दिन की जा सकती है। सबसे आवश्यक तत्व है नियम और संयम

साधना की सरल विधि

साधना के लिए अत्यधिक जटिल विधि आवश्यक नहीं होती। स्वच्छ स्थान, शांत वातावरण और एकाग्र मन ही पर्याप्त है। साधक पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठे, सामने दीपक जलाए और माता बगलामुखी का ध्यान करे।

साधना के समय मौन, संयम और सकारात्मक भाव अत्यंत आवश्यक हैं। यह साधना आवेश या क्रोध से नहीं, बल्कि न्याय और आत्मरक्षा के भाव से की जानी चाहिए।

माता बगलामुखी मंत्र संग्रह

माता बगलामुखी मंत्र संग्रह

शत्रु बाधा निवारण और सर्व कार्य सिद्धि के मंत्र

देवी बगलामुखी के विशेष मंत्र

माता बगलामुखी मंत्र (स्तम्भन)

ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा ॥

सर्व कार्य सिद्धि हेतु मंत्र

ॐ ह्रीं ऐं क्लीं श्री बगलानने मम रिपून नाशय नाशय ममैश्वर्याणि देहि देहि शीघ्रं मनोवाञ्छितं साधय साधय ह्रीं स्वाहा ॥

बगलामुखी मूल मंत्र (सरल)

ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै ह्लीं ॐ नमः॥

बगलामुखी शत्रु नाशक मंत्र

ॐ बगलामुखी देव्यै ह्लीं ह्रीं क्लीं शत्रु नाशं कुरु॥
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मंत्र जप की संख्या और सावधानियाँ

सामान्य रूप से एक माला जप से साधना आरंभ की जा सकती है। विशेष साधना में संख्या बढ़ाई जा सकती है, लेकिन बिना गुरु मार्गदर्शन अत्यधिक प्रयोग से बचना चाहिए। माता बगलामुखी की साधना में अनुशासन और मर्यादा अत्यंत आवश्यक है।

यह साधना किसी को नुकसान पहुँचाने की भावना से नहीं, बल्कि स्वयं की रक्षा और सत्य की स्थापना के लिए की जानी चाहिए। गलत उद्देश्य से की गई साधना फल नहीं देती।

माता बगलामुखी साधना के संकेत

जब माता बगलामुखी की कृपा होने लगती है, तो साधक को अनुभव होने लगता है कि विरोध स्वतः शांत हो रहा है। शत्रु की योजनाएँ असफल होने लगती हैं, झूठे आरोप कमजोर पड़ते हैं और मन में एक अद्भुत स्थिरता आने लगती है। यह संकेत होता है कि साधक की साधना सही दिशा में जा रही है।

गृहस्थ जीवन में माता बगलामुखी साधना

यह मान्यता गलत है कि बगलामुखी साधना केवल तांत्रिकों के लिए है। गृहस्थ भी पूरी श्रद्धा और नियम के साथ यह साधना कर सकते हैं। बस उद्देश्य शुद्ध होना चाहिए। जब साधना आत्मरक्षा और धर्म की रक्षा के लिए की जाती है, तब माता की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।

माता बगलामुखी की सच्ची कृपा

माता बगलामुखी भय की नहीं, बल्कि निर्भयता की देवी हैं। वे शत्रु को नष्ट नहीं करतीं, बल्कि उसके दुष्ट भाव को निष्क्रिय कर देती हैं। जो साधक संयम, श्रद्धा और शुद्ध उद्देश्य के साथ उनकी साधना करता है, उसके जीवन में स्थिरता, सुरक्षा और आत्मविश्वास स्वतः आ जाता है।

यही माता बगलामुखी की सच्ची कृपा है।

लेखक: Tejas Lathiya Vedpuransar
यह लेख तांत्रिक-शास्त्रीय भावनाओं और सनातन परंपरा से प्रेरित होकर भक्तों के मार्गदर्शन हेतु प्रस्तुत किया गया है।

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