अनादिकल्पेश्वर महादेव – उज्जैन के महाकाल वन का आदि-अनंत शिवलिंग उज्जैन के अनादिकल्पेश्वर महादेव की पौराणिक कथा, ब्रह्मा–विष्णु विवाद, दर्शन-लाभ, महत्व और महाकाल परिसर में स्थित इस दिव्य शिवलिंग का आध्यात्मिक रहस्य। जानिए क्यों यह लिंग सृष्टि का मूल माना गया है।
|| अनादिकल्पेश्वर महादेव || (5-84)
अनादिकल्पेश्वर महादेव का परिचय
उज्जैन का महाकाल वन केवल महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का ही नहीं, बल्कि अनादि काल से पूजित अनेक दिव्य शिवलिंगों का केंद्र है।
ऐसे ही अत्यंत पवित्र शिवलिंगों में से एक है —
श्री अनादिकल्पेश्वर महादेव
यह वही शिवलिंग है जिसे स्वयं भगवान रुद्र ने माता पार्वती को “कल्प से भी पहले प्रकट” बताया।
यही कारण है कि इस लिंग को आदि-अनंत, सृष्टि का मूल, समस्त चर-अचर का बीज और देवाधिदेव महादेव का स्वयंभू स्वरूप माना गया है।
पौराणिक उल्लेख: सृष्टि से पूर्व का शिवलिंग
शिव पुराण में रूद्र परमात्मा माता पार्वती से कहते हैं—
“अनादिकल्पेश्वरं देवं पंचमं विद्धि पार्वति।
सर्व पापहरं नित्यं अनादिर्गीयते सदा।”
अर्थात—
यह अनादिकल्पेश्वर वही शिवलिंग है जो कल्पों से पहले प्रकट हुआ, जब—
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- अग्नि नहीं थी
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- सूर्य नहीं था
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- चंद्र ग्रह नहीं
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- पृथ्वी, आकाश, दिशा, वायु, जल कुछ भी नहीं
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- न देवता थे, न असुर, न गंधर्व, न पिशाच
उस समय केवल ‘वह अनादि लिंग’ ही विद्यमान था।
इसी लिंग से—
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- देवताओं का वंश
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- पितृ
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- ऋषिगण
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- और समस्त चर-अचर सृष्टि
समुदित हुई और अंतकाल में इसी में लीन हो जाती है।
ब्रह्मा–विष्णु विवाद और अनादिकल्पेश्वर की दिव्य कथा
एक बार ब्रह्मा और विष्णु में विवाद हुआ—
“हम दोनों में बड़ा कौन?”
तभी दिव्य आकाशवाणी हुई—
“हे देवताओं! महाकाल वन में एक दिव्य लिंग है — कल्पेश्वर।
जो उसके ‘आदि’ या ‘अंत’ का पता लगा ले, वही श्रेष्ठ है।”
दोनों देव पूर्ण शक्ति के साथ महाकाल वन पहुँचे।
ब्रह्मा ऊपर की ओर चले
विष्णु नीचे की ओर
दोनों अनंत काल तक तलाशते रहे, लेकिन—
-
- न सुरूआत मिली
-
- न अंत
वह शिवलिंग अनंत, असीम, अदृश्य ही रहा।
अनंतता देखकर दोनों देवों ने स्वीकार किया—
“हमारे प्रयास सीमित थे।
यह लिंग ही अनादि–अनंत शिव का प्रतीक है।”
इसी घटना के बाद यह शिवलिंग अनादिकल्पेश्वर नाम से प्रसिद्ध हुआ।
अनादिकल्पेश्वर महादेव का धार्मिक महत्व
यह शिवलिंग सृष्टि का मूल माना जाता है। जिस प्रकार—
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- सूर्य प्रकाश का मूल है
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- समुद्र जल का मूल है
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- अग्नि ऊष्मा का मूल है
उसी प्रकार यह लिंग समस्त सृष्टि और तत्त्वों का मूल माना गया है।
शास्त्रों में कहा गया है—
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- जितने तीर्थों में अभिषेक करने से जो पुण्य मिलता है,
उससे अधिक पुण्य केवल इसके दर्शन मात्र से मिलता है।
- जितने तीर्थों में अभिषेक करने से जो पुण्य मिलता है,
-
- पापों से भरा मन भी
अनादिकल्पेश्वर के दर्शन से पवित्र हो जाता है।
- पापों से भरा मन भी
-
- यह लिंग काल, कर्म और जन्म-मरण के भय को मिटाने वाला है।
-
- इसके दर्शन से मनुष्य—
मोक्ष मार्ग, ज्ञान, और शिवकृपा प्राप्त करता है।
- इसके दर्शन से मनुष्य—
दर्शन और पूजा विधि
यह शिवलिंग अत्यंत सरल और सौम्य स्वरूप में पूजित है।
भक्त यहाँ निम्न प्रकार से पूजा करते हैं—
1. जलाभिषेक
गंगाजल या शुद्ध जल अर्पित करने से पाप क्षीण होते हैं।
2. बिल्वपत्र अर्पण
शिवरात्रि और सोमवारी के दिन विशेष फल मिलता है।
3. मंत्र जाप
“ॐ नमः शिवाय”
“ॐ अनादिकल्पेश्वराय नमः”
इन मंत्रों का जाप अत्यंत फलदायी है।
4. ध्यान
यह स्थान इतना शांत है कि यहाँ बैठकर ध्यान करने से
मन स्वतः शिवत्व में लीन हो जाता है।
अनादिकल्पेश्वर महादेव कहाँ स्थित है?
स्थान:
यह दिव्य शिवलिंग महाकाल मंदिर परिसर के भीतर स्थित है।
महाकालेश्वर के दर्शन करने आने वाला लगभग प्रत्येक भक्त
यहाँ अवश्य दर्शन करता है।
अनादिकल्पेश्वर महादेव के दर्शन क्यों करें?
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- पाप विनाश
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- मोक्ष मार्ग की प्राप्ति
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- दैवीय शक्ति और रक्षा
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- जन्म-मरण के बंधनों से मुक्ति
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- सृष्टि के मूल तत्त्व से सीधे संपर्क
यहाँ दर्शन से मन अत्यंत शांत हो जाता है
और भक्त को शिव की अनंत ऊर्जा का आभास होता है।
भक्तों के अनुभव
श्रद्धालु कहते हैं कि जैसे ही अनादिकल्पेश्वर के सामने खड़े होते हैं—
वातावरण में
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- एक दिव्य शांति
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- कालातीत ऊर्जा
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- और अनंतता का अनुभव
महसूस होता है।
- और अनंतता का अनुभव
मानो शिव स्वयं उपस्थित हों।
Vedpuransar
अनादिकल्पेश्वर महादेव उज्जैन का केवल एक मंदिर नहीं,
बल्कि सृष्टि के आदि-अनंत स्वरूप का प्रत्यक्ष प्रतीक है।
जिस लिंग से संसार आरंभ हुआ और जिसमें संसार लीन होता है—
वह लिंग आज भी महाकाल परिसर में उसी दिव्यता के साथ पूजित है।
यदि आप आध्यात्मिक उन्नति, पाप-मुक्ति और शिवत्व का अनुभव चाहते हैं,
तो अनादिकल्पेश्वर महादेव का दर्शन अवश्य करें।
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