गुहेश्वर महादेव मंदिर – उज्जैन के 84 महादेवों में गुफा में स्थित दिव्य शिवलिंग हे|
उज्जैन के रामघाट पर स्थित गुहेश्वर महादेव मंदिर की पौराणिक कथा, ऋषि मंकणक की तपस्या, अभिमान और भगवान शिव के आशीर्वाद से जुड़ी दिव्य गाथा। जानें इसके दर्शन और महत्व।
|| गुहेश्वर महादेव ||
(2-84)
गुहेश्वर महादेव का परिचय :
उज्जैन, जिसे अवंतिका और महाकाल की नगरी कहा जाता है, 84 महादेव मंदिरों के लिए भी प्रसिद्ध है।
इन्हीं में से एक दिव्य और रहस्यमय मंदिर है — गुहेश्वर महादेव। यह मंदिर रामघाट पर पिशाच मुक्तेश्वर मंदिर के पास, एक सुरंग के भीतर स्थित है।
गुहेश्वर महादेव का महत्व केवल उनके स्थान के कारण नहीं, बल्कि उनकी पौराणिक कथा और ऋषि मंकणक की तपस्या से भी जुड़ा हुआ है।
यहाँ का शिवलिंग भक्तों को विनम्रता, सिद्धियों का सही उपयोग और अहंकार के त्याग का संदेश देता है।
पौराणिक कथा: ऋषि मंकणक का अभिमान:
प्राचीन काल में एक महान योगी हुए जिनका नाम मंकणक ऋषि था। वे वेद और वेदांगों में पारंगत थे और हमेशा सिद्धि की प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या में लीन रहते थे।
एक दिन जब वे देवदारु वन में तपस्या कर रहे थे, तभी उनके हाथ में कुश का कांटा लग गया।
किंतु रक्त की जगह वहाँ से शाक रस (वनस्पति का रस) निकलने लगा।
यह देखकर ऋषि मंकणक अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने सोचा —
“यह मेरी तपस्या और सिद्धि का परिणाम है।”
वे गर्व में आकर नृत्य करने लगे।
ब्रह्मांड में हाहाकार और देवताओं की चिंता:
ऋषि के इस नृत्य से पूरा जगत डगमगा गया।
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नदियाँ उलटी दिशा में बहने लगीं।
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ग्रहों की गति उलट गई।
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संपूर्ण ब्रह्मांड में हाहाकार मच गया।
देवताओं ने इस स्थिति को देखकर घबराकर भगवान शंकर की शरण ली। उन्होंने शिवजी से प्रार्थना की कि वे जाकर ऋषि मंकणक को रोकें।
भगवान शिव और ऋषि मंकणक का संवाद:
शिवजी ऋषि मंकणक के पास पहुँचे और उन्हें नृत्य करने से मना किया।
ऋषि ने अहंकारपूर्वक अपनी सिद्धि के बारे में बताया।
तब भगवान शिव ने अपनी अंगुली के अग्रभाग से थोड़ी भस्म निकाली और कहा:
“देखो, मुझे इस सिद्धि पर अभिमान नहीं है और मैं नृत्य भी नहीं कर रहा हूँ।”
भगवान शिव की यह विनम्रता देखकर ऋषि मंकणक लज्जित हो गए। उन्होंने शिवजी से क्षमा माँगी और पूछा कि उन्हें तप की वृद्धि कैसे करनी चाहिए।
महाकाल वन में लिंग की प्राप्ति
शिवजी ने उन्हें आशीर्वाद देकर कहा:
“महाकाल वन जाओ। वहाँ सप्तकुल में उत्पन्न एक दिव्य लिंग मिलेगा। उसके दर्शन मात्र से तुम्हारा तप बढ़ जाएगा।”
ऋषि मंकणक महाकाल वन गए और वहाँ एक गुफा के पास उन्हें दिव्य लिंग के दर्शन हुए। उन्होंने बड़ी श्रद्धा से उस लिंग की पूजा-अर्चना की।
उनकी तपस्या और पूजा से वे सूर्य के समान तेजस्वी हो गए और उन्हें अनेक दुर्लभ सिद्धियाँ प्राप्त हुईं।
वह दिव्य लिंग आगे चलकर गुहेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
गुहेश्वर महादेव मंदिर का महत्व:
गुहेश्वर महादेव का मंदिर केवल उज्जैन की आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक शिक्षा भी है। यह मंदिर हमें सिखाता है कि —
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सिद्धि प्राप्त करना ही अंतिम लक्ष्य नहीं है, उसका विनम्रता से उपयोग करना ही सच्ची साधना है।
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यहाँ दर्शन और पूजा करने से अहंकार नष्ट होता है।
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गुहेश्वर महादेव की कृपा से भक्त को सिद्धियों का सदुपयोग करने की समर्थता मिलती है।
दर्शन और पूजन की विशेषता:
गुहेश्वर महादेव के दर्शन और पूजन का विशेष महत्व माना गया है।
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श्रावण मास में यहाँ पूजा करना विशेष फलदायी होता है।
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अष्टमी और चतुर्दशी (चौदस) के दिन यहाँ पूजन करने से भक्त को सिद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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भक्त यहाँ जलाभिषेक, बिल्वपत्र अर्पण और मंत्रजाप करते हैं।
रामघाट और सुरंग का रहस्य:
गुहेश्वर महादेव मंदिर का एक और विशेष आकर्षण है कि यह मंदिर रामघाट पर एक गुफा (सुरंग) के भीतर स्थित है।
गुफा का यह वातावरण भक्त को ध्यान और साधना के लिए अद्भुत शांति प्रदान करता है।
गुहेश्वर महादेव के दर्शन करने वाला भक्त ऐसा अनुभव करता है मानो वह भगवान शिव की गोद में बैठकर सिद्धि, शक्ति और शांति प्राप्त कर रहा हो।
क्यों करें गुहेश्वर महादेव की आराधना?
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अहंकार का नाश – पूजा से अहंकार और अभिमान का नाश होता है।
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सिद्धियों का सदुपयोग – भगवान की कृपा से साधक को सही दिशा मिलती है।
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आध्यात्मिक उन्नति – ध्यान और भक्ति से साधक तेजस्वी बनता है।
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श्रावण मास का महत्व – इस मास में दर्शन करने से पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
निष्कर्ष – Vedpuransar
Vedpuransar के अनुसार, गुहेश्वर महादेव केवल उज्जैन का ही नहीं, बल्कि पूरे भारतवर्ष का एक अद्वितीय आध्यात्मिक स्थल है।
ऋषि मंकणक की कथा हमें यह सिखाती है कि सिद्धि तभी सार्थक है जब उसमें विनम्रता और समर्पण जुड़ा हो।
गुहेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना से साधक को न केवल सिद्धि प्राप्त होती है, बल्कि अहंकार का विनाश होकर जीवन में शांति और स्थिरता भी आती है।
यदि आप उज्जैन जाएँ, तो रामघाट स्थित इस दिव्य गुफा मंदिर के दर्शन अवश्य करें।
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अगली कहानी में जानिए उज्जैन के 84 महादेवों में से तीसरे महादेव की पौराणिक कथा और उनके दिव्य महत्व के बारे में।
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शिव महापुराण
यह पुस्तक भक्तों और अध्यात्म में रुचि रखने वालों के लिए उपयुक्त है। इसमें शिवजी की कथाएँ और महापुराण की प्रमुख घटनाएँ सरल भाषा में समझाई गई हैं।






