संपूर्ण ग्रह मंत्र संग्रह: नवग्रहों की शक्ति, प्रभाव और साधना विधि vedpuransar.com

संपूर्ण ग्रह मंत्र संग्रह: नवग्रहों की शक्ति, प्रभाव और साधना विधि | Vedpuransar नवग्रहों के सभी मंत्रों की संपूर्ण जानकारी, ग्रह दोष शांति, जप विधि और आध्यात्मिक प्रभाव जानिए। Vedpuransar पर शुद्ध वैदिक मार्गदर्शन।

नवग्रह और मानव जीवन का गहरा संबंध

सनातन वैदिक परंपरा में नवग्रह केवल आकाशीय पिंड नहीं हैं, बल्कि वे जीवन को संचालित करने वाली सूक्ष्म शक्तियाँ माने गए हैं। जन्म से लेकर कर्म, स्वास्थ्य, धन, संबंध और आध्यात्मिक प्रगति — इन सभी पर ग्रहों का प्रभाव माना गया है।

इसी कारण वेदों और पुराणों में ग्रहों की शांति और संतुलन के लिए ग्रह मंत्रों की साधना को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। ग्रह मंत्रों का उद्देश्य केवल दोष निवारण नहीं, बल्कि साधक के जीवन में संतुलन और विवेक स्थापित करना है।

नवग्रह मंत्र क्या होते हैं?

नवग्रह मंत्र वे विशेष वैदिक मंत्र हैं, जिनके माध्यम से प्रत्येक ग्रह की शक्ति को संतुलित और सकारात्मक बनाया जाता है। हर ग्रह का अपना स्वभाव, ऊर्जा और प्रभाव होता है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में कोई ग्रह असंतुलित होता है, तो उसका प्रभाव जीवन के किसी न किसी क्षेत्र में दिखाई देता है।

ग्रह मंत्रों का नियमित जप उस ग्रह की नकारात्मक ऊर्जा को शांत करता है और सकारात्मक प्रभाव को सक्रिय करता है।

नवग्रह बीज मंत्र संग्रह

नवग्रह (नौ ग्रह) बीज मंत्र संग्रह

ग्रह शांति और शुभ फल प्राप्ति के लिए शक्तिशाली बीज मंत्र

ग्रहों के बीज मंत्र

सूर्य मंत्र (Sun)

ॐ ह्रीं ह्रौं सूर्याय नमः ॥

चंद्र मंत्र (Moon)

ॐ ऐं क्लीं सोमाय नमः ॥

मंगल मंत्र (Mars)

ॐ हूं श्रीं भौमाय नमः ॥

बुध मंत्र (Mercury)

ॐ ऐं श्रीं श्रीं बुधाय नमः ॥

बृहस्पति मंत्र (Jupiter)

ॐ ह्रीं क्लीं हूं बृहस्पतये नमः ॥

शुक्र मंत्र (Venus)

ॐ श्रीं शुक्राय नमः ॥

शनि मंत्र (Saturn)

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं शनैश्चराय नमः ॥

राहु मंत्र (Rahu)

ॐ ऐं ह्रीं राहवे नमः ॥

केतु मंत्र (Ketu)

ॐ ह्रीं ऐं केतवे नमः ॥
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सूर्य ग्रह मंत्र – आत्मबल और नेतृत्व की शक्ति

सूर्य को नवग्रहों का राजा कहा गया है। यह आत्मबल, आत्मविश्वास, सम्मान और जीवन ऊर्जा का कारक है। सूर्य ग्रह के मंत्रों का जप विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना गया है, जिनके जीवन में आत्मविश्वास की कमी या सम्मान से जुड़े अवरोध होते हैं।

चंद्र ग्रह मंत्र – मन, भावनाएँ और शांति

चंद्रमा मन का प्रतिनिधित्व करता है। मानसिक स्थिरता, भावनात्मक संतुलन और माता से संबंध — यह सब चंद्र ग्रह से जुड़ा माना गया है। चंद्र ग्रह के मंत्रों का जप मानसिक अशांति, भय और तनाव को कम करने में सहायक होता है।

मंगल ग्रह मंत्र – साहस, ऊर्जा और निर्णय शक्ति

मंगल ग्रह साहस, पराक्रम और ऊर्जा का प्रतीक है। यदि मंगल असंतुलित हो तो क्रोध, जल्दबाज़ी और संघर्ष बढ़ सकते हैं। मंगल ग्रह मंत्र साधक को संयम, साहस और सही निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करते हैं।

बुध ग्रह मंत्र – बुद्धि, वाणी और व्यापार

बुध ग्रह बुद्धि, संवाद और गणना का स्वामी है। शिक्षा, व्यापार और वाणी की स्पष्टता पर बुध का गहरा प्रभाव माना जाता है। बुध ग्रह के मंत्रों का जप मानसिक स्पष्टता और व्यावहारिक बुद्धि को मजबूत करता है।

गुरु ग्रह मंत्र – ज्ञान, धर्म और आशीर्वाद

गुरु ग्रह को देवगुरु बृहस्पति कहा गया है। यह ज्ञान, धर्म, सदाचार और गुरु कृपा का कारक है। गुरु ग्रह के मंत्रों का जप जीवन में मार्गदर्शन, स्थिरता और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।

शुक्र ग्रह मंत्र – प्रेम, सौंदर्य और भौतिक सुख

शुक्र ग्रह भोग, प्रेम, कला और सौंदर्य से जुड़ा है। शुक्र के असंतुलन से संबंधों और भौतिक सुखों में बाधा आ सकती है। शुक्र ग्रह मंत्र जीवन में सामंजस्य और आनंद को बढ़ाते हैं।

शनि ग्रह मंत्र – कर्म, अनुशासन और न्याय

शनि ग्रह को कर्मफल दाता कहा गया है। यह जीवन में अनुशासन, धैर्य और न्याय की परीक्षा लेता है। शनि ग्रह मंत्र भय को दूर कर साधक को कर्मपथ पर स्थिर करते हैं।

राहु ग्रह मंत्र – भ्रम से मुक्ति और चेतना

राहु ग्रह अचानक परिवर्तन, भ्रम और छाया तत्व से जुड़ा माना जाता है। राहु ग्रह मंत्र साधक को भ्रम से बाहर निकालकर विवेक प्रदान करते हैं।

केतु ग्रह मंत्र – वैराग्य और आध्यात्मिक जागरण

केतु ग्रह मोक्ष, वैराग्य और अंतर्दृष्टि का प्रतीक है। केतु ग्रह मंत्र साधक को आध्यात्मिक मार्ग की ओर अग्रसर करते हैं।

ग्रह मंत्र जप की सामान्य विधि

ग्रह मंत्रों का जप शांत वातावरण में, नियमित समय पर और श्रद्धा के साथ करना चाहिए। जप के दौरान मन को स्थिर रखना और संकल्प लेना आवश्यक माना गया है। माला का प्रयोग जप को व्यवस्थित और केंद्रित बनाता है।

Vedpuransar पर उपलब्ध जप काउंटर साधना को सरल और अनुशासित करने में सहायक है।

ग्रह मंत्र और कर्म शुद्धि

शास्त्रों के अनुसार ग्रह मंत्रों का प्रभाव केवल वर्तमान जीवन तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह पूर्व संस्कारों और कर्मों को भी संतुलित करता है। जब साधक ग्रह मंत्रों के माध्यम से आत्मशुद्धि करता है, तो जीवन में स्वतः संतुलन आने लगता है।

नवग्रह साधना का वास्तविक उद्देश्य

नवग्रह मंत्रों की साधना भय या लालच के लिए नहीं, बल्कि आत्मिक संतुलन और धर्मपूर्ण जीवन के लिए की जाती है। जब साधक श्रद्धा से ग्रह मंत्रों का जप करता है, तो नवग्रह बाधा नहीं, बल्कि मार्गदर्शक बन जाते हैं।

 

✍️ लेखक: Tejas Lathiya Vedpuransar

यह लेख शुद्ध वैदिक दृष्टिकोण, पुराणीय परंपरा और भक्तिभाव के साथ प्रस्तुत किया गया है।

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