संपूर्ण लक्ष्मी मंत्र संग्रह: महालक्ष्मी की कृपा, धन-संपदा और साधना का रहस्य

संपूर्ण लक्ष्मी मंत्र संग्रह: महालक्ष्मी की कृपा, धन-संपदा और साधना विधि | लक्ष्मी मंत्रों की संपूर्ण जानकारी, महालक्ष्मी की कृपा प्राप्ति, धन-संपदा, साधना विधि और शास्त्रीय रहस्य जानिए Vedpuransar.com पर।

महालक्ष्मी – केवल धन की देवी नहीं

सनातन धर्म में माता लक्ष्मी को सामान्य रूप से केवल धन और वैभव की देवी मान लिया गया है, जबकि शास्त्रों के अनुसार वे इससे कहीं अधिक हैं। महालक्ष्मी संपूर्ण सृष्टि की समृद्धि, संतुलन और सौभाग्य की अधिष्ठात्री शक्ति हैं। जहाँ लक्ष्मी का वास होता है, वहाँ केवल धन ही नहीं, बल्कि शांति, सदाचार, संतुलन और संतोष भी निवास करते हैं।

इसी कारण वेदों, पुराणों और तंत्र शास्त्रों में लक्ष्मी साधना को अत्यंत सूक्ष्म और मर्यादित साधना माना गया है। लक्ष्मी मंत्रों का उद्देश्य केवल धन प्राप्ति नहीं, बल्कि साधक के जीवन में अधर्म, आलस्य और असंतुलन का नाश करना भी है।

लक्ष्मी मंत्रों का शास्त्रीय महत्व

लक्ष्मी मंत्र वे दिव्य ध्वनि-संरचनाएँ हैं, जिनके माध्यम से साधक महालक्ष्मी तत्व से जुड़ता है। मंत्रों की ध्वनि साधक के मन, प्राण और चेतना पर प्रभाव डालती है। यही कारण है कि शास्त्रों में कहा गया है —
“जहाँ मंत्र है, वहाँ शक्ति है।”

लक्ष्मी मंत्रों का नियमित जप साधक को भौतिक और आध्यात्मिक — दोनों स्तरों पर संतुलित करता है। यदि साधना केवल लालच से की जाए तो उसका फल सीमित होता है, लेकिन यदि श्रद्धा और मर्यादा से की जाए तो लक्ष्मी स्थायी बनती हैं।

सभी लक्ष्मी मंत्र क्यों होते हैं?

बहुत से लोग यह प्रश्न करते हैं कि जब लक्ष्मी एक ही हैं, तो उनके मंत्र अनेक क्यों हैं। इसका उत्तर शास्त्रों में स्पष्ट रूप से मिलता है। माता लक्ष्मी के अनेक स्वरूप हैं —
कहीं वे दारिद्र्य नाश करती हैं, कहीं स्थिर धन प्रदान करती हैं, कहीं साधक को वैराग्य और संतुलन देती हैं।

इसी कारण अलग-अलग प्रयोजन के लिए अलग-अलग लक्ष्मी मंत्र बताए गए हैं। प्रत्येक मंत्र का उद्देश्य, प्रभाव और साधना विधि भिन्न होती है।

देवी लक्ष्मी मंत्र संग्रह

देवी लक्ष्मी मंत्र संग्रह

धन, समृद्धि और ऐश्वर्य के लिए विशेष मंत्र

विभिन्न लक्ष्मी मंत्र

लक्ष्मी मंत्र – 1 (दरिद्रता नाशक)

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ ॥

लक्ष्मी मंत्र – 2 (बीज मंत्र)

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौं ॐ ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौं ऐं क्लीं ह्रीं श्री ॐ ॥

लक्ष्मी मंत्र – 3 (धन पूरक)

ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्मी मम गृहे धनं पूरय पूरय चिंतायै दूरय दूरय स्वाहा ॥

महालक्ष्मी मंत्र (सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो)

ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन धान्यः सुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ॐ ॥

लक्ष्मी गायत्री मंत्र

ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि। तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ ॥

ज्येष्ठा लक्ष्मी मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ज्येष्ठ लक्ष्मी स्वयम्भुवे ह्रीं ज्येष्ठायै नमः ॥

महालक्ष्मी यक्षिणी विद्या

ॐ ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः ॥

श्री लक्ष्मी नृसिंह मंत्र

ॐ क्लीं क्ष्रौं श्रीं लक्ष्मीदेव्यै नमः ॥

एकादशाक्षर सिद्ध लक्ष्मी मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सिद्ध लक्ष्म्यै नमः ॥
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लक्ष्मी मंत्र जप का आध्यात्मिक विज्ञान

लक्ष्मी मंत्र का प्रभाव केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहता। जब साधक नियमित जप करता है, तो उसकी वाणी, विचार और कर्म में शुद्धता आने लगती है। शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि लक्ष्मी अशुद्ध स्थान, अशुद्ध विचार और अशुद्ध कर्म में स्थिर नहीं होतीं

इसलिए लक्ष्मी मंत्र साधना का पहला नियम है —
आंतरिक और बाह्य शुद्धता।

जैसे-जैसे साधक का मन स्थिर होता है, वैसे-वैसे लक्ष्मी तत्व सक्रिय होने लगता है।

लक्ष्मी मंत्र जप की सही विधि

लक्ष्मी मंत्र जप के लिए अत्यंत जटिल अनुष्ठान आवश्यक नहीं हैं, लेकिन अनुशासन अनिवार्य है। जप शांत स्थान पर, स्वच्छ वस्त्र धारण कर, और मन को स्थिर करके किया जाना चाहिए।

प्रातः काल या संध्या समय लक्ष्मी साधना के लिए विशेष रूप से अनुकूल माना गया है। दीप प्रज्वलन और स्वल्प नैवेद्य साधना की भावना को और गहरा करता है।

माला लक्ष्य और संकल्प का महत्व

लक्ष्मी मंत्र जप में माला लक्ष्य साधना की रीढ़ होता है। बिना लक्ष्य के किया गया जप साधक को भटका सकता है। संकल्प के साथ किया गया जप साधना को शक्ति देता है।

1 माला से आरंभ कर धीरे-धीरे साधक अपनी क्षमता के अनुसार लक्ष्य बढ़ा सकता है। Vedpuransar पर उपलब्ध जप काउंटर इस साधना को व्यवस्थित और सरल बनाता है।

लक्ष्मी मंत्र साधना से होने वाले लाभ

लक्ष्मी मंत्र साधना के प्रभाव धीरे-धीरे प्रकट होते हैं, लेकिन वे स्थायी होते हैं। साधक के जीवन में धन के साथ-साथ स्थिरता, अवसर और विवेक आने लगता है। खर्च पर नियंत्रण, आय में संतुलन और जीवन में स्पष्टता — यह सब लक्ष्मी साधना के संकेत माने जाते हैं।

आध्यात्मिक दृष्टि से लक्ष्मी मंत्र साधक को अहंकार और लालच से मुक्त करने में भी सहायक होते हैं।

लक्ष्मी मंत्र और दारिद्र्य का शास्त्रीय अर्थ

शास्त्रों में दारिद्र्य का अर्थ केवल धन की कमी नहीं है।
अविवेक, असंतोष और अशांति — यह भी दारिद्र्य के रूप हैं। लक्ष्मी मंत्र साधना इन सभी स्तरों पर कार्य करती है।

जब साधक के विचार शुद्ध होते हैं, तभी लक्ष्मी स्थायी होती हैं।


गृहस्थ जीवन में लक्ष्मी मंत्र की भूमिका

लक्ष्मी मंत्र केवल साधकों या तपस्वियों के लिए नहीं हैं। गृहस्थ जीवन में लक्ष्मी साधना संतुलन और सौहार्द लाती है। जिस घर में श्रद्धा से लक्ष्मी मंत्र जप होता है, वहाँ कलह और अस्थिरता धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है।

लक्ष्मी साधना का वास्तविक उद्देश्य

लक्ष्मी मंत्रों की साधना का अंतिम उद्देश्य केवल धन प्राप्ति नहीं, बल्कि संतुलित, धर्मपूर्ण और शांत जीवन है। जब साधक इस भाव से साधना करता है, तब महालक्ष्मी स्वयं उसके जीवन में स्थिर होती हैं।

✍️ लेखक: Tejas Lathiya Vedpuransar

यह लेख शास्त्रीय मर्यादा, भक्तिभाव और वैदिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया गया है।

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