संपूर्ण कात्यायनी मंत्र संग्रह: विवाह बाधा निवारण, माता कात्यायनी की कृपा और साधना विधि

सनातन धर्म में विवाह को केवल सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि एक पवित्र संस्कार माना गया है। जीवन के चार पुरुषार्थों — धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — में गृहस्थ आश्रम का विशेष स्थान है। परंतु आज के समय में बहुत से युवक और युवतियाँ विलम्बित विवाह, बार-बार रिश्ते टूटना, मानसिक तनाव, या अनुकूल जीवनसाथी न मिलने जैसी समस्याओं से गुजर रहे हैं। ऐसे समय में शास्त्रों में माता कात्यायनी की साधना को एक अत्यंत प्रभावशाली आध्यात्मिक उपाय माना गया है। माता कात्यायनी न केवल विवाह योग प्रदान करने वाली देवी हैं, बल्कि वे मन और भाग्य की उन ग्रंथियों को खोलती हैं, जो विवाह में अनावश्यक विलम्ब और बाधा उत्पन्न करती हैं।

शास्त्रों में माता कात्यायनी का महत्व

माता कात्यायनी को नवदुर्गा की छठी शक्ति के रूप में पूजा जाता है। देवी भागवत और पुराणों में उनका वर्णन महायोगिनी और महाशक्ति के रूप में मिलता है। उनका प्राकट्य महर्षि कात्यायन के आश्रम में हुआ था, इसलिए वे कात्यायनी कहलाईं।

भागवत पुराण में वर्णन आता है कि ब्रज की गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए माता कात्यायनी की साधना की थी। यह कथा इस बात का प्रमाण है कि माता कात्यायनी की कृपा से विवाह संबंधी मनोकामनाएँ शीघ्र पूर्ण होती हैं।


माता कात्यायनी का स्वरूप और उसका आध्यात्मिक अर्थ

माता कात्यायनी का स्वरूप तेजस्वी और संतुलित है। वे सिंह पर विराजमान हैं, जो साहस, निर्णय और आत्मबल का प्रतीक है। उनके हाथों में अस्त्र-शस्त्र यह दर्शाते हैं कि वे केवल सौम्य देवी नहीं, बल्कि विवाह मार्ग में आने वाली नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली शक्ति भी हैं।

यह स्वरूप संकेत देता है कि विवाह में आने वाली बाधाएँ केवल सामाजिक नहीं होतीं, कई बार वे मानसिक, कर्मिक और आध्यात्मिक भी होती हैं, जिन्हें माता कात्यायनी की शक्ति ही दूर कर सकती है।

विवाह में विलम्ब के आध्यात्मिक कारण

शास्त्रों के अनुसार विवाह में विलम्ब केवल बाहरी कारणों से नहीं होता। इसके पीछे कई सूक्ष्म कारण हो सकते हैं, जैसे:

  • पूर्व जन्म के संस्कार

  • ग्रह दोष

  • मानसिक भय या आत्मविश्वास की कमी

  • अवचेतन में असुरक्षा

  • पारिवारिक नकारात्मक ऊर्जा

माता कात्यायनी की साधना इन सभी स्तरों पर कार्य करती है — मन, भाग्य और परिस्थितियों पर।

कात्यायनी मंत्र साधना का वास्तविक उद्देश्य

बहुत से लोग कात्यायनी मंत्रों को केवल विवाह प्राप्ति तक सीमित मानते हैं, जबकि उनका उद्देश्य कहीं अधिक व्यापक है। यह साधना:

  • विवाह योग को सक्रिय करती है

  • सही और अनुकूल जीवनसाथी का मार्ग प्रशस्त करती है

  • बार-बार टूटते रिश्तों की समस्या को शांत करती है

  • मानसिक भ्रम और भय को दूर करती है

  • आत्मविश्वास और स्त्री-पुरुष दोनों में संतुलन लाती है

यह साधना किसी को बाँधने के लिए नहीं, बल्कि प्राकृतिक और धर्मसम्मत विवाह योग को प्रबल करने के लिए होती है।

किसके लिए विशेष रूप से लाभकारी है यह साधना

कात्यायनी साधना विशेष रूप से उन युवतियों और युवकों के लिए लाभकारी मानी जाती है:

  • जिनका विवाह आयु निकलने के बाद भी नहीं हो पा रहा

  • जिनके रिश्ते बार-बार बिना कारण टूट जाते हैं

  • जिन्हें मनचाहा या अनुकूल जीवनसाथी नहीं मिल पा रहा

  • जिनके विवाह में पारिवारिक या सामाजिक बाधाएँ हैं

यह साधना मन को स्थिर करके सही निर्णय और सही समय दोनों प्रदान करती है।

कात्यायनी साधना का श्रेष्ठ समय

नवरात्रि में माता कात्यायनी की साधना अत्यंत फलदायी मानी जाती है, विशेष रूप से नवदुर्गा की छठी तिथि। इसके अतिरिक्त शुक्रवार, सोमवार और पूर्णिमा भी शुभ मानी जाती है।

प्रातः ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल में साधना करना श्रेष्ठ माना जाता है। सबसे आवश्यक तत्व है नियमितता और श्रद्धा

साधना की सरल विधि

साधना के लिए किसी जटिल विधि की आवश्यकता नहीं होती। स्वच्छ स्थान पर, शांत मन से माता कात्यायनी का ध्यान किया जाए। दीपक जलाकर, उन्हें अपने जीवन की बाधाओं का स्मरण कराकर, श्रद्धा से साधना करना ही पर्याप्त है।

यह साधना भय या अधीरता से नहीं, बल्कि धैर्य और विश्वास से करनी चाहिए।

विवाह और शीघ्र विवाह हेतु मंत्र संग्रह

विवाह और शीघ्र विवाह हेतु मंत्र संग्रह

विवाह बाधा निवारण और मनोवांछित वर/वधू प्राप्ति के लिए

विवाह हेतु मुख्य मंत्र

कात्यायनी मंत्र (मनोवांछित वर हेतु)

कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि । नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः ॥

पार्वती/गौरी मंत्र (विलम्ब निवारण)

हे गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया । तथा मां कुरु कल्याणि कान्तकातां सुदुर्लभाम ॥

सूर्य मंत्र (शीघ्र विवाह एवं आरोग्य)

ॐ देवेन्द्राणि नमस्तुभ्यं देवेन्द्रप्रिय भामिनि । विवाहं भाग्यमारोग्यं शीघ्रलाभं च देहि मे ॥

भगवान शिव का विवाह मंत्र (पुरुषार्थ सिद्धि)

ॐ शं शंकराय सकल जन्मार्जित पाप विध्वंसनाय पुरुषार्थ चतुष्टय लाभाय च पतिं मे देहि कुरु-कुरु स्वाहा ॥

अन्य कात्यायनी मंत्र

कात्यायनी बीज मंत्र - 1

ॐ ह्रीं कात्यायन्यै स्वाहा ॥

कात्यायनी बीज मंत्र - 2

ह्रीं श्रीं कात्यायन्यै स्वाहा ॥
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मंत्र जप की अवधि और संयम

सामान्य रूप से 21, 40 या 108 दिनों की साधना पर्याप्त मानी जाती है। जप की संख्या साधक की क्षमता पर निर्भर करती है, लेकिन संख्या से अधिक महत्वपूर्ण है नियम, संयम और पवित्र भाव

साधना के दौरान नकारात्मक विचार, क्रोध और अधीरता से बचना चाहिए।

कात्यायनी कृपा के संकेत

जब माता कात्यायनी की कृपा होने लगती है, तो जीवन में सहज संकेत मिलने लगते हैं। अचानक अच्छे प्रस्ताव आने लगते हैं, परिवार का सहयोग बढ़ता है, मन में भय कम होता है और भविष्य को लेकर एक सकारात्मक शांति अनुभव होने लगती है।

ये संकेत बताते हैं कि साधना सही दिशा में आगे बढ़ रही है।

गृहस्थ जीवन और कात्यायनी साधना

यह एक भ्रम है कि विवाह से पहले ही यह साधना की जाती है। विवाहित जीवन में भी यदि मानसिक दूरी, तनाव या असंतुलन हो, तो माता कात्यायनी की साधना संबंधों में मधुरता और स्थिरता लाती है।

माता कात्यायनी की सच्ची कृपा

माता कात्यायनी केवल विवाह कराने वाली देवी नहीं हैं, बल्कि वे जीवन में सही संबंध, सही समय और सही निर्णय प्रदान करने वाली शक्ति हैं। जो साधक श्रद्धा, धैर्य और विश्वास के साथ उनकी साधना करता है, उसके जीवन में विवाह केवल घटना नहीं, बल्कि एक पवित्र और संतुलित यात्रा बन जाता है।

यही माता कात्यायनी की सच्ची कृपा है।

लेखक: Tejas Lathiya Vedpuransar
यह लेख पुराण, भागवत परंपरा और सनातन श्रद्धा से प्रेरित होकर भक्तों के मार्गदर्शन हेतु प्रस्तुत किया गया है।

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